एक सौम्य, प्रखर नेतृत्व और निष्ठावान हिंदी सेवी की कमी हमेशा खलेगी

लोक सभा में कश्मीर को लेकर ऐतिहासिक फैसले को जान कर सुषमा जी को प्रसन्नता कि देर ही सही एक पुरानी भूल को सुधारा गया और देश की मुख्य धारा में कश्मीर को शामिल किया गया . उन्ह्ने यह भी लगा कि नकारात्मक माहौल ख्त्म होगा और उस क्षेत्र के विकास और उन्नति के मार्ग प्रशस्त होंगे. ट्विट कर उन्होने प्रधानमंत्री जी को बधाई दी. उनके जीवन का यह स्वप्न पूरा हुआ पर किसी को इसका भान नहीं था कि उनके पार्थिव जीवन का यह अंतिम दिवस होगा. पिछले चार वर्षों से वह अस्वस्थ्य अवश्य थीं पर जिस जीवट और लगन के साथ एक गरिमापूर्ण राजनेता की जो छाप उन्ह्नोने भारतीय राजनीति पर छोड़ी वह बेमिसाल है. एक कर्मठ व्यक्तित्व की धनी सुषमा जी जिस काम को ठानती थीं  उसे सुरुचि और मानवीय संवेदना के साथ निभाती थीं.  

राजनीति का माहौल जिस तरह बिगड़ता रहा है उसके किर्दारों के बीच अपवाद स्वरूप सुषमा जी ने राष्ट्रीय और अंतर राष्ट्रीय स्तर पर भारत, भारतीयता और भाषा-भारती हिंदी तीनों का मस्तक ऊंचा उठाया. विदेश मंत्री के रूप में परराष्ट्र मंत्रालय का दायित्व संभाल कर उन्होने अनेक संवादों में भारत का पक्ष बड़ी दृढता से प्रस्तुत किया. एक विकसित देश की प्रभावी नेत्री के रूप में अति विकसित और विकासशील दोनों ही तरह के देशों के साथ दृढता के साथ पेश आते हुए भारत के हितों की रक्षा करने में उनकी अविस्मरणीय भूमिका रही. सबसे बड़ी बात तो यह थी कि वह सबकी पहुंच तक उपलब्ध रहती थीं और यथासंभव हर किसी की सहायता करती थीं. पूर्व में विदेश मंत्रालय की छवि घोर अंग्रेजीदां रही है . सुषमा जी ने अथक प्रयास से मानकों की प्रतिष्ठा रखते हुए भारत की राज भाषा हिंदी को उसका अपेक्षित सम्मन दिलाया . यह सिर्फ हिंदी के प्रयोग  की ही बात नहीं  थी , इसमें भासार्वभौम सत्ता सम्पन्न देश की प्रतिष्ठा का भी प्रश्न था. विदेशी राजनयिक अपने देश की भाषा का प्रयोग करते हैं जब कि हम अंग्रेजी का ही उपयोग करते रहे हैं. माननीय मोदी जी और विदेश मंत्री श्रीमती सुषमा स्वराज  ने  अंतरराष्ट्रीय  राजनय में देश की भाषा के उपयोग को प्रोत्साहित किया और कर के दिखाया . उन्होने हमसे कहा कि  आप हमें रूपांतरकार दीजिए जो विभिन्न विदेशी भाषाओं से सीधे हिंदी में अनुवाद करेऔर हिंदी से उन भाषाओं में भी . उन्होने वर्धा विश्वविद्यालय के जापानी , चीनी और स्पेनी भाषाओं के छात्रों को  मंत्रालय में बुला कर  चर्चा की और प्रोत्साहित किया.  इस दिशा में विश्व विद्यालय सक्रिय है.

यह संयोग ही था कि उनके विदेश मंत्री रहते हुए हिंदी के दो  विश्व सम्मेलन  सम्पन्न हुए ,  एक भोपल में 2015 में और दूसरा मारिशस में 2018 में. दोनों ही आयोजन बड़े ही भव्य थे और गुणवत्ता की दृष्टि से  पहले के आयोजनों से स्तर में आगे थे.  इनमें कार्य सम्पादन के लिए उन्होने परामर्श की व्यवस्थित  पद्धति विकसित की और नियमित चर्चा करती थीं. वह प्रत्येक कार्य की खबर रखती थीं. उनके नेतृत्व में  इन आयोजनों ने प्रामाणिकता अर्जित की. वे स्वयं कार्य में विश्वास करती थीं और उसके लिए  सतत प्रेरित भी करती रहती थीं. प्राय: ऐसे आयोजन मेले जैसे होते हैं और कर लोग शीघ्र ही भूल जाते हैं परंतु सुषमा जी ने बड़ी ही रुचि से उनके प्रतिवेदन को यथाशीघ्र प्रकाशित करने का उपक्रम किया. वर्धा विश्व विद्यालय द्वारा भोपाल में हुए विश्व सम्मेलन का प्रतिवेदन छह मास में प्रकाशित किया. यही नहीं सुषमा जी ने उनमें स्वीकृत प्रस्तावों पर अनुवर्ती कार्यवाही को भी सुनिश्चित किया.

हिंदी को लेकर प्राय: वादे होते रहे हैं पर जमीनी स्तर पर काम कम ही हो पाता है. सुषमा जी ने इस मिथ को तोड़ा और विदेश मंत्रालय में हिंदी को कई तरह से प्रतिष्ठा दिलाई. पासपोर्ट तथा अन्य दस्तावेजों में हिंदी के प्रयोग को स्थान मिला. हिंदी के विदेशों में अध्यापन के पीठों की संख्या भी बढी. संयुक्त राष्ट्र में सभी दस्तावेजों की हिंदी में उपलब्धता सुनिश्चित कराई . अब वहां से हिंदी में समाचार बुलेटिन आती है. उन्होने हिंदी की अन्तरराष्ट्रीय जगत में उपस्ठिति के सम्बर्धन के लिए भारतीय सांस्कृतिक सम्बंध परिषद  को हर तरह से समृद्ध करने का प्रयास किया. वह स्वयं हिंदी की सरल,  सुबोध और जनोपयोगी शैली के उपयोग को प्राथमिकता देती थी, आज कल मीडिया में हिंदी के उपयोग में होने वाली त्रुटियों की ओर भी उनका ध्यान गया था और सम्पादकों के साथ एक विचारोत्तेजक चर्चा भी की थी कि भाषा के संस्कार को किस तरह ठीक किया जाय. उनकी वक्तृता  और प्रत्युत्पन्न मति के तो सभी कायल थे . उनसे बहुत कुछ सीखने को मिला. ऐसे प्रखर पर शालीन और शुद्ध भारतीय व्यक्तित्व की प्रिय नेत्री को हमारी हार्दिक श्रद्धांजलि !

Published by mindsocietyandlife

Former Vice Chancellor Mahatma Gandhi Antararashtriya Hindi University, Wardha- Nagapur Maharashtra; Former Head, Department of Psychology, University of Delhi; Delhi.

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